Login Here

Pupils Login Form

 



विश्वविद्यालय का संक्षिप्त परिचय

डॉ बी आर अम्बेडकर विश्वविद्यालय की नींव रेव कैनन ऐडवर्ड्स की तरह उत्साही शिक्षाविदों के एक बैंड के व्यस्त प्रयासों का एक परिणाम के रूप में, 1 जुलाई 1927 पर रखी गई थी

आगे पढ़ें »

महाविद्यालय का संक्षिप्त परिचय

परम विख्यात महान तेजस्वी प्रतापी महर्षि कपिलमुनि के सुनाम पर संचालित भारतीय महाविधालय की आधार शिला व सुस्थापना का स्वपन महाविधालय संस्थापक एवं सचिवप्रबंधक..

आगे पढ़ें »

क्यों तुम्हें हमारे साथ अध्ययन करना चाहिए

विधार्थियों के स्वाध्याय हेतु पुस्तकालय की उचित व्यवस्था है जिसमें विधार्थी रिक्त कक्षाओं में एकान्तचित होकर स्वाध्याय करते हैं। पुस्तकालय में विधार्थियों के विषय संबंधी व प्रतिस्पर्धा..

आगे पढ़ें »

शिक्षा और छात्र अनुभव

शिक्षा प्रणालियों शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए, अक्सर छात्रों और युवाओं के लिए स्थापित की जाती है एक पाठ्यक्रम (curriculum) छात्रों को क्या पता होना चाहिए,

आगे पढ़ें »

अंतर्राष्ट्रीय छात्र

विदेशी छात्रों को तभी प्रवेश दिया जायेगा जबकि उनके पास स्टूडेण्ट वीसा हो और भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा प्रदेश सरकार के विदेशी रजिस्टे्रशन विभाग द्वारा स्वीकृत हो।

आगे पढ़ें »

महर्षि कपिलमुनि संस्थापन व भारतीय कपिलमुनि स्नातकोत्तर महाविद्यालय का इतिहासरूपरेखा(संक्षिप्त परिचय)

परम विख्यात महान तेजस्वी प्रतापी महर्षि कपिलमुनि के सुनाम पर संचालित भारतीय महाविद्यालय की आधार शिला व सुस्थापना का स्वपन महाविद्यालय संस्थापक एवं सचिवप्रबंधक सेना से अवकाश प्राप्त मेजर युधिष्ठर सिंह ने देखा। नितान्त पिछले हुए क्षेत्र से उच्च शिक्षा की महती कमी ने सिंह साहब के मन मसितष्क को सत प्रेरित किया। उक्त प्रेरणा रूपी स्वप्न को श्री सिंह साहब ने र्इश्वर का आशीर्वाद रूप में ग्रहण करते हुए क्षेत्र की उदारगमन तारीख सहयोगी जनता के बीच अप्रैल सन 1989 से जाना शुभारम्भ किया। परिणामत: जनता के बीच अपने ह्रदस्थ अप्राप्य स्वप्न को बताया। क्षेत्रवासियों को सिंह साहब पर तो अटूट विश्वास था, लेकिन स्वप्न, विचार, तथा उदगार को श्रवण कर दिया स्वप्न की संज्ञा दी नकारात्मक दृषिटकोण रखने वाले सहयोगियों ने सिंह साहब से कहा - यह असाध्य कार्य असम्भव है अप्राप्य तथा नामुमकिन है साथ ही साथ उपहास से भी सिंचित किया। महान दार्शनिक एमर्शन के अनुसार - आत्म विश्वास सफलता का मुख्य रहस्य है (Self trust is the first secret of success)उक्त पंकित को चरितार्थ करते हुए यथानाम तथा गुण: नाम से धर्मराज आत्मविश्वासी मेजर युधिष्ठर सिंह र्इश्वर प्रदत्त प्रेरणा से प्रेरित होकर असहयोगियों द्वारा किये गये उपहास को चुनौती रूप से सहर्ष स्वीकार करते हुए इस असाध्य कार्य को करने के लिए दृढ संकलिपत हो गये। किसी दार्शनिक ने सत्य कहा है धैर्य और दृढ़ संकल्प सफलता का मूलमंत्र है संकल्प सफलता का मूलमंत्र है। उक्त पंकित से प्रेरित होकर साहसी निर्भीक, उदार सरल स्वभाव से अंलकृत अहर्निस परिश्रम करने वाले सिंह साहब ने महाविद्यालय की सुसंस्थापना हेतु अपनी जन्मस्थली बेवर में पूंजीपति जनता के बीच अपनी बात रखी इसके प्श्चात बेवर के टाउनहाल में उक्त विषय से सम्बनिधत एक संगोष्ठी का आयोजन किया संगोष्ठी को बहस के रूप में परिवर्तित कर विश्व के आठवें आश्चर्य की संज्ञा देकर सिंह साहब को चुनौती से आप्लावित कर दिया। दृ़ढ़ संकलिपत व सच्ची लगन से मेजर साहब को प्रति पल प्रेरित किया। इसके पश्चात सकारात्मक दृषिटकोण रखने वाले सिंह साहब महर्षि कपिलमुनि की तपोस्थली पवित्र भूमि ग्राम करपिया में अपने बचपन के सहपाठी मित्र डा। सुरेंद्र सिंह राठौर के पास आकर दिवस के द्वितीय प्रहर से मिलें। जहां राठौर साहब अपनी भैसों को चरा रहे थे सिंह साहब ने अपने उदगार एस.एस. राठौर से उच्चरित किये। सिंह साहब के उदगारों से प्रेरित श्री राठौर जी ने सिंह साहब को त्रिवाच रूपी वचन दिया कि यदि आप महाविद्यालय का निर्माण करायेंगे तो मैं तुम्हें अपनी पत्नी श्रीमती रामदुलारी के नाम पर छह बीघा जमीन दान दूंगा। यदि हौसले बुलन्द हैं तो मंजिल मिल ही जायेगी। तुम चलो एक कदम तो वह दस कदम स्वयं चली आयेगी .. तत्पश्चात इसी दिन सिंह साहब के समतुल्य अपने मामा रामसिंह ग्राम प्रधान के पास पहुंचे जिन्होंने छह बीघा जमीन को देने की सत घोषणा कर अपने भांजे के सतोत्साहित किया। इसी बीच उन्होंने ग्राम प्रधान की हैसियत से सभा की। सभा में सिंह साहब ने अपने मार्मिक उदबोधन में कहा इस गांव की मिटटी से मैं जुड़ा हूं, इसी गांव में मैंने अपना बचपन बिताया था। ज्ञात नहीं था। कि भविष्य में शिक्षा की ज्योति का वीणा भी इस गांव से उठाउंगा। यदि आप लोग मुझे जमीन दान दे तो मैं इसी गांव में उच्च शिक्षा की कमी को दूर करने के लिए डिग्री कालेज का निर्माण सभी के सहयोग से कुछ करें। कुछ लोगों ने सिंह साहब के विचारों से प्रेरित होकर जमीन दान देने की सत घोषणा कर परिणामतय: 7 बीघा जमीन की उदघोषणा से सिंह साहब ने प्रेरित होकर 17,500 रू। गांव से 15 दिन में चंदारूप में प्राप्त किये जमीन के साथ-साथ धन अर्जित कर सिंह साहब का स्वप्न दृढ़ संकल्प में परिवर्तित हो गया। शनै: शनै: विश्वास व स्वप्न कार्यरूप् में परिणित हुआ। (जीवन में सफलता के लिए परिश्रम बहुत आवश्यक है)

"Patience and the determination are the bugde words"

 महाविद्यालय का शिलान्यास पूर्व विधायक श्री रामदीन, डा। राम सिंह, डा। एई सुरेन् सिंह राठौर, विधा राम यादव, श्री विनायक दत्त दूबे, श्री नेत्रपाल सिंह बचपन के सहपाठी श्री लक्ष्मी रतन सर्राफ, श्री दीपसिंह, श्री विष्णु शंकर मिश्र, झब्बू सिंह यादव आदि से कराने का व्रत पूर्ण कर सिंह साहब ने महर्षि कपिलमुनि आश्रम में भारत के समस्त मानवों के द्वारा पूजित पवित्र विशाल पीपल का वृक्ष की शीतल छाया में मन्द-मन्द पवन दुलार में एक संगोष्ी की जिसमें सहयोग की आंकाक्षा से ओत-प्रोत सतरूपी आप्त वचनों को कहां उक्त उदगोरों से प्रेरित संगोष्ठी सहयोगियों ने पूर्ण सहयोग देने का आश्वास दिया । शिलान्यास के पश्चात सिंह साहब पिपीलिका की भांति चन्दे की खोज में अहर्निश परिश्रम करने लगे और प्रतिदिन प्रति प्रहर बेवर से जुडे़ सभी गांवों में चन्दा के रूप में गेंहू, पैसा सहर्ष स्वीकार कर लाकर महाविद्यालय के विकास में शीघ्रता कर दी। इसके पश्चात जिला मैनपुरी के अनेक पूंजीपतियों से मिलें उन्होंने भी सहयोग कर उत्साहवर्धन का कार्य किया। इसके पश्चात श्री सिंह साहब महाविद्यालय के समीप सिथत गग्गरपुर आश्रम में प्रसिद्ध व सिद्ध ऋषि श्री श्री 108 श्री सुखराज गिरि महाराज के पास पहुंचे उनके समक्ष महाविद्यालय स्थापना का संक्षिप्त परिचय बताकर गुरूजी से करबद्ध प्रार्थना कर कमलरूपी चरण पड़ने के लिए महाविद्यालय आने की आतिमक गुहार की । गुरू सर्वश्र होता है। ह्रदस्थ गुहार को सुनकर महाविद्यालय में पदार्पण करने की सहर्ष स्वीकृति दे दी। श्री श्री 108 श्री सुखराज गिरि जी महाराज, गुरू जी अचानक ही दो दिवस महाविद्यालय के सहयोग के लिये देता हूं और आश्रम पर बुधवार और गुरूवार को बैठूंगा। इधर प्रतापी महर्षि की पवित्र पावन तपोभूमि पर सुस्थापित महाविद्यालय के सहयोग के लिए तपस्वी गुरू जी सुखराज गिरि जी महाराज आ गये उस परमपिता परमात्मा का शुभ मुहर्त कैसा अवर्णनीय सहयोग जो कि संगम सा हो गया। इध रनाम से धर्मराज मेजर युधिष्ठर सिंह जी का सत्प्रयास सत्सहयोग श्री श्री परम तपस्वी महर्षि कपिल मुनि महाराज की तपोभूमि पर निर्मित महाविद्यालय। इधर कालेज का निर्माण शनै: शनै: होने लेगा 11 जुलार्इ 1994 को अस्थायी सम्बद्धता महामहिम मोतीलाल बोरा राज्यपाल उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा मिली, जिसमें महत्वपूर्ण सहयोग राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री सुबोध नाथ झा का रहा। (इसके पश्चात सन 1995-96 में महाविद्यालय में परीक्षाकेन् एई के लिए अथक प्रयास सिंह साहब ने प्रेरित किया परिणामत:। 27 जून 1996 को परीक्षा केन् æ स्वीकृति पत्र कुलपति महोदय आगरा विश्वविधालय आगरा द्वारा मिला। (188 छात्र-छात्राओं से यहां परीक्षा केन् æ बना) जुलार्इ 1996 4 से महाविद्यालय में प्रथम परीक्षा की शुरूआत हुर्इ। माह अगस्त सन 1997 में डा। बी.आर. अम्बेडकर विश्वविधालय आगरा द्वारामहाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना की एक इकार्इ प्रदान की गर्इ। जिसमें 100 छात्र-छात्राएं नामांकित हुये। सन 1997 में राष्ट्रीय कैडेट कोर की एक बटालियन कम्पनी प्रदान की गयी। जिसमें 100 छात्र-छात्रायें नामांकित हुये। महाविद्यालय का विस्तारण होते-होते जुलार्इ सन 2000 से महाविद्यालय को स्थायी सम्बद्धता प्रदान की गयी 1। तत्पश्चात महाविद्यालय के विकास से सम्बनिधत विश्वविधालय अनुदान आयोग नर्इ दिल्ली (यूजीसी) के द्वारा 2 (एफ) व 12 (बी) में महाविद्यालय का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। अगस्त 2001 में 23 को स्वीकृत पत्र प्राप्त हुआ। विश्वविधालय अनुदान आयोग द्वारा इस महाविद्यालय को प्रथम अनुदान कम्प्यूटर के लिए प्राप्त हुआ। इस सत्र में महाविद्यालय में कम्प्यूटर प्रशिक्षण दिया जायेगा। जिसमें 100 छात्र-छात्राओं का नामांकन किया जायेगा।

भारतीय कपिल मुनि स्नातकोत्तर महाविद्यालय
करपिया - बेवर मैनपुरी
205301

05673-263054
bkmc1990@gmail.com